क्या आप जानते हैं कि 2024 ऐसा साल था जब दुनिया के कई मोर्चों पर गोलियाँ चलीं, लेकिन सबसे ज़्यादा आवाज़ हथियार बेचने वाली कंपनियों के बैंक अकाउंट में गूँजी?
रूस–यूक्रेन युद्ध, इज़राइल–हमास संघर्ष, चीन–ताइवान तनाव, पश्चिम एशिया में उथल-पुथल…
इन सबने दुनिया को असुरक्षा में धकेला, लेकिन हथियार बनाने वाली कंपनियों को इतिहास की सबसे बड़ी कमाई दे दी।
SIPRI की ताज़ा रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि
“जहाँ दुनिया की सुरक्षा गिर रही है, वहीं हथियार कंपनियों की कमाई (revenues) आसमान छू रही है।”
टॉप 100 हथियार कंपनियों ने 2024 में रिकॉर्ड $679 बिलियन की बिक्री की यानी हर गुजरते संघर्ष के साथ हथियार उद्योग और अमीर होता गया।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि कंपनियाँ कितना कमा रही हैं…
सवाल यह है कि दुनिया किस दिशा में जा रही है? Peace या Profit?
यही सवाल इस रिपोर्ट को दुनिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
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SIPRI रिपोर्ट क्या कहती है?
SIPRI के अनुसार:
- Top 100 हथियार कंपनियों ने 2024 में $679 Billion की बिक्री की।
- यह पिछले साल की तुलना में एक बड़ा उछाल (surge) है।
- अमेरिका, यूरोप और चीन की कंपनियाँ सूची में सबसे ऊपर हैं।
- युद्ध बढ़ने के साथ missile systems, drones, fighter jets और surveillance technology की मांग तेजी से बढ़ी है।
SIPRI ने साफ कहा:
“जितना संघर्ष बढ़ेगा, उतना हथियारों की भूख बढ़ेगी।”
SIPRI Report Homepage: https://sipri.org

टॉप 25 हथियार बनाने वाली कंपनियाँ (SIPRI 2024)
नीचे वे कंपनियाँ हैं जिनकी कमाई सबसे ज़्यादा रही:
| रैंक | कंपनी | देश | कमाई (2024) | मतलब |
|---|---|---|---|---|
| 1 | Lockheed Martin | USA | $64.65bn | F-35 jets, missiles – दुनिया की नंबर 1 हथियार कंपनी |
| 2 | RTX (Raytheon) | USA | $43.6bn | Air defense systems जैसे Patriot |
| 3 | Northrop Grumman | USA | $37.85bn | Nuclear systems, drones |
| 4 | BAE Systems | UK | $33.79bn | यूरोप की सबसे बड़ी defense निर्माता |
| 5 | General Dynamics | USA | $33.63bn | Tanks, submarines |
| 6 | Boeing Defense | USA | $30.55bn | Fighter jets |
| 7 | Rostec | Russia | $27.12bn | रूसी हथियारों का सबसे बड़ा निर्माता |
| 8 | AVIC | China | $20.32bn | Chinese fighter jets |
| 9 | CETC | China | $18.92bn | Electronics, radars |
| 10 | L3Harris | USA | $16.21bn | Surveillance systems |
| 11 | NORINCO | China | $13.97bn | Heavy weapons |
| 12 | Leonardo | Italy | $13.83bn | Helicopters, radars |
| … | … | … | … | … |
स्पष्ट है कि Top 10 में 6 अमेरिकी और 4 चीनी/यूरोपीय कंपनियाँ हैं—यानी सैन्य शक्ति की दौड़ बेहद तेज़ है।
युद्ध बढ़ेंगे तो हथियारों का व्यवसाय क्यों बढ़ता है?
यह सवाल सबसे बड़ा है।
1. देशों को हथियारों की तुरंत जरूरत पड़ती है
Russia-Ukraine युद्ध ने दिखा दिया कि बिना हथियारों के लड़ाई टिक नहीं सकती।
2. घरेलू उत्पादन + विदेश से खरीद
कई देश अपने defense budget तेजी से बढ़ा रहे हैं।
3. नए खतरे Drones, Cyberwarfare
ये नए क्षेत्र बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं।
4. Geopolitical competition
अमेरिका vs चीन
नाटो vs रूस
इज़राइल vs ईरान
ये टकराव defense spending को बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका: दुनिया का “Defense Supermarket”
Top 10 में:
- Lockheed
- Raytheon
- Northrop Grumman
- Boeing
- General Dynamics
5 सबसे बड़ी कंपनियाँ अमेरिका की हैं।
अमेरिका ने 2024 में $916 Billion का रक्षा बजट पास किया जो दुनिया में सबसे ज़्यादा है।
इसका मतलब:
हथियारों की सबसे बड़ी मांग भी अमेरिका पैदा करता है और सबसे ज़्यादा हथियार बेचता भी वही है।
World Bank – Military Expenditure Dataset https://data.worldbank.org/indicator/MS.MIL.XPND.GD.ZS
चीन: दूसरा उभरता हथियार महाशक्ति
चीन ने 2024 में:
- Hypersonic missiles
- 5th generation fighter jets
- AI-based drones
- Naval destroyers
का उत्पादन तेज़ कर दिया।
Top 25 में चीन की 6 कंपनियाँ हैं और यह संख्या हर साल बढ़ रही है।
यह दिखाता है कि चीन सिर्फ आर्थिक नहीं, सैन्य महाशक्ति बनने पर भी फोकस कर रहा है।
रूस: युद्ध अर्थव्यवस्था
Russia की Rostec कंपनी ने $27.12bn की कमाई की।
क्योंकि:
- Ukraine युद्ध जारी
- भारत, अफ्रीका और एशिया को हथियार आपूर्ति
- मिसाइल और टैंक सिस्टम की भारी मांग
रूस पूरी तरह “war-driven production model” पर चल रहा है।
World Bank Military Spending:https://data.worldbank.org/indicator/MS.MIL.XPND.GD.ZS
यूरोप: हथियारों की मांग अचानक बढ़ी
NATO देशों ने रूस से खतरे के कारण:
- अपने defense budget बढ़ाए
- अमेरिका/UK से हथियार खरीदे
- घरेलू हथियार उत्पादन बढ़ाया
BAE Systems (UK) इसका बड़ा उदाहरण है।
SpaceX जैसी कंपनियाँ भी कैसे हथियार उद्योग में आ गईं?
Elon Musk की SpaceX को भी military contracts मिले क्योंकि:
- Satellite internet (Starlink)
- Secure communication systems
- Space-based surveillance
- Military rockets
अब आधुनिक युद्ध “भूमि-आधारित” नहीं है space भी नया battlefield है।
इसलिए civilian tech कंपनियाँ भी military tech companies बन रही हैं।
UN Peace & Security Official Pagehttps://www.un.org/en/peace-and-security

भारत पर इसका क्या असर पड़ा?
भारत भी रक्षा खरीद और उत्पादन दोनों बढ़ा रहा है:
1. रक्षा बजट बढ़ा
2024-25 में भारत ने अपना रक्षा खर्च बढ़ाया है।
2. Make in India Defence
HAL, BEL, DRDO जैसी कंपनियाँ हथियार निर्माण बढ़ा रही हैं।
3. हथियारों का आयात अभी भी ऊँचा
भारत दुनिया के टॉप 3 हथियार आयातकों में से है।
4. भारत हथियार निर्यात भी बढ़ा रहा
भारत अब:
- ब्रह्मोस मिसाइल
- Pinaka rockets
- Akash air defense
- Made in India drones
दूसरे देशों को बेच रहा है।
क्या ये दुनिया के लिए खतरा है?
Absolutely, Yes.
1. हथियार कंपनियाँ युद्ध बढ़ने पर खुश होती हैं
यह dangerous trend है क्योंकि उनका profit युद्ध पर निर्भर है।
2. देशों के बीच अविश्वास (Mistrust) बढ़ता है
जब एक देश हथियार खरीदेगा दूसरा भी खरीदने लगेगा।
3. Global Peace कम हो रहा है
बड़ी शक्तियाँ प्रतिस्पर्धा में उलझी हैं।
4. हथियारों की होड़ (Arms Race) नए युद्ध को जन्म दे सकती है
UPSC महत्वपूर्ण बिंदु
GS Paper 2 & 3:
- Global Arms Trade
- International Relations
- Defence Budget
- Arms Race
- India’s Strategic Autonomy
- Make in India (Defence)
- Space Militarization
- Role of SIPRI
यह विषय हर साल IR या Security section में आता है।
निष्कर्ष
SIPRI की रिपोर्ट सिर्फ एक आर्थिक दस्तावेज़ नहीं है, यह आने वाले समय की चेतावनी है।
दुनिया जितनी तेज़ी से हथियारों पर खर्च बढ़ा रही है, उतनी ही तेज़ी से शांति का संतुलन बिगड़ता जा रहा है।
आज अमेरिका, चीन, रूस और यूरोप हथियारों की नई दौड़ में शामिल हैं
लेकिन इस दौड़ में विजेता कोई नहीं होता,
हारने वाला हमेशा मानवता ही होती है।
2024 हथियार कंपनियों के लिए “सबसे मुनाफ़े वाला साल” हो सकता है,
लेकिन दुनिया के लिए यह सबसे ख़तरनाक संकेत भी है।
क्योंकि जब मुनाफ़ा युद्ध से जुड़ जाए,
तो शांति का भविष्य कमजोर पड़ने लगता है।
भारत जैसे उभरते देशों के लिए ये रिपोर्ट याद दिलाती है कि
आत्मनिर्भर रक्षा (self-reliance in defence) अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि समय की जरूरत है।
हमें हथियारों की होड़ में शामिल हुए बिना अपनी सुरक्षा मजबूत करनी होगी।
आख़िरकार
दुनिया को हथियारों की नहीं, संवाद और सहयोग की ज़रूरत है।
युद्ध अगर कमाएगा तो मानवता हमेशा हारेगी।
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लेखक के बारे में
सिद्धार्थ तिवारी, Mudda Bharat Ka के संस्थापक, लेखक और geopolitics, defence affairs तथा national issues के गहरे अध्येता हैं।
इनका उद्देश्य है भारत से जुड़ी नीतियों, वैश्विक मुद्दों और समसामयिक घटनाओं को सरल, तथ्यपूर्ण और engaging शैली में पाठकों तक पहुँचाना।
Siddharth वर्तमान घटनाओं (current affairs) को ground-level समझ के साथ पेश करते हैं, ताकि पाठक केवल खबर न जानें, बल्कि उसके पीछे की पूरी कहानी समझ सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. SIPRI क्या है और यह रिपोर्ट क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है?
SIPRI (Stockholm International Peace Research Institute) एक अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था है जो हथियार व्यापार, रक्षा व्यय (defence spending) और वैश्विक सुरक्षा पर सबसे विश्वसनीय डेटा जारी करती है। इसकी रिपोर्टें दुनिया भर की सरकारें और नीति-निर्माता उपयोग करते हैं।
2. 2024 में हथियार कंपनियों की कमाई अचानक क्यों बढ़ गई?
यूक्रेन–रूस युद्ध, इज़राइल–हमास संघर्ष, चीन–ताइवान तनाव और पश्चिम एशिया में हिंसा बढ़ने से देशों ने हथियार खरीद में तेज़ी लाई। इसका सीधा फायदा हथियार बनाने वाली कंपनियों को मिला।
3. सबसे ज्यादा हथियार कौन बनाता है – USA, China या Russia?
SIPRI रिपोर्ट के मुताबिक USA अभी भी दुनिया की नंबर 1 हथियार निर्माता और विक्रेता शक्ति है। चीन तेजी से दूसरे स्थान पर आ रहा है जबकि रूस युद्ध अर्थव्यवस्था के कारण तेज़ी से उत्पादन बढ़ा रहा है।
4. क्या भारत भी हथियारों का बड़ा खरीदार है?
हाँ, भारत दुनिया के टॉप 3 हथियार आयातकों (arms importers) में शामिल है। साथ ही भारत अपने घरेलू हथियार उत्पादन (Make in India Defence) को भी तेजी से बढ़ा रहा है।
5. क्या यह हथियारों की बढ़ती होड़ दुनिया के लिए खतरनाक है?
हाँ। बढ़ता सैन्य खर्च (military expenditure) और हथियारों की दौड़ (arms race) वैश्विक शांति के लिए खतरा है। इससे युद्ध और संघर्ष बढ़ने की संभावना रहती है।
6. क्या civilian कंपनियाँ भी अब defense क्षेत्र में आ रही हैं?
हाँ। SpaceX, Amazon, Google Cloud जैसी tech कंपनियाँ अब space-based surveillance, secure communication और AI-military tech में प्रवेश कर चुकी हैं।
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