📅 2025 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब है?
वर्ष 2025 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व सोमवार, 16 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा।
- अष्टमी तिथि प्रारंभ – 16 अगस्त 2025, प्रातः 11:42 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त – 17 अगस्त 2025, प्रातः 09:17 बजे
- निशीथ पूजा का समय (मध्यरात्रि पूजा) – 16 अगस्त की रात 11:58 बजे से 17 अगस्त की रात 12:43 बजे तक
- पराण (व्रत तोड़ने) का समय – 17 अगस्त प्रातः
इस साल जन्माष्टमी सोमवार को पड़ रही है, जिसे रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि के संगम में मनाया जाएगा, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।
🌸 श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025: भक्ति, उल्लास और दिव्यता का पर्व 🌸
“जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब मैं अवतरित होता हूँ।” – भगवद्गीता, अध्याय 4, श्लोक 7
भारत की संस्कृति में अगर कोई ऐसा पर्व है जो भक्ति, आनंद, उत्साह और प्रेम का संगम है, तो वह है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी। यह सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और प्रेम के संदेश का प्रतीक है। हर साल करोड़ों लोग, मध्यरात्रि के पावन समय में, कान्हा के जन्मोत्सव का उत्सव मनाते हैं।

1. जन्माष्टमी का महत्व
जन्माष्टमी, भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की स्मृति में मनाया जाता है।
- यह पर्व भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ता है।
- मान्यता है कि भगवान विष्णु ने असुरों का संहार और धर्म की पुनर्स्थापना करने के लिए द्वापर युग में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया।
- यह दिन अहिंसा, सत्य, धर्म और प्रेम का संदेश देता है।
2. इतिहास और पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार:
- मथुरा के राजा कंस अपनी बहन देवकी और उनके पति वासुदेव से अत्यधिक प्रेम करता था, लेकिन एक भविष्यवाणी ने सब बदल दिया।
- आकाशवाणी ने कंस को बताया कि देवकी का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण बनेगा।
- भय से ग्रस्त कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया और उनके पहले छह बच्चों को जन्म लेते ही मार दिया।
- सातवें गर्भ में बलराम जी का जन्म होना था, लेकिन योगमाया ने उन्हें रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया।
- आठवें गर्भ में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। जन्म के समय चमत्कारिक घटनाएं हुईं—कारागार के दरवाजे खुल गए, पहरेदार सो गए, और यमुना ने वासुदेव को रास्ता दिया ताकि वे शिशु को गोकुल पहुंचा सकें।
3. क्यों मनाते हैं जन्माष्टमी
- धर्म की रक्षा – श्रीकृष्ण का जीवन अधर्म पर धर्म की जीत का उदाहरण है।
- असत्य पर सत्य की विजय – कंस जैसे अत्याचारी का अंत।
- मानवता का संदेश – कृष्ण का सन्देश प्रेम, करुणा और निष्काम कर्म है।
- सांस्कृतिक पहचान – यह त्योहार भारत की गहरी आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाता है।
4. भारत में जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है
- मथुरा और वृंदावन – यहां पूरे हफ्ते मेले, झांकियां, रासलीला और भजन होते हैं।
- महाराष्ट्र – दही हांडी का आयोजन, जहां युवक-युवतियां पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ते हैं।
- गुजरात – मंदिरों में गरबा और रास नृत्य।
- दक्षिण भारत – घरों में रंगोली, मक्खन मिश्री का भोग और झूले पर बाल गोपाल की प्रतिमा।
- पूर्वोत्तर – मणिपुर में रासलीला का विशेष आयोजन।
5. विदेशों में जन्माष्टमी
- USA, UK, Canada – ISKCON मंदिरों में भजन-संकीर्तन, भगवद्गीता पाठ और झांकियां।
- फिजी, मॉरीशस – यहां के भारतीय समुदाय बड़े पैमाने पर मेला लगाते हैं।
- ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड – कृष्ण भक्त पूरे दिन उपवास और रात्रि में महाआरती करते हैं।
6. व्रत और पूजा विधि
- उपवास – भक्त सुबह से अगले दिन तक फलाहार या निर्जल व्रत रखते हैं।
- मध्यरात्रि पूजा – ठीक 12 बजे बालकृष्ण की प्रतिमा का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है।
- भोग – मक्खन, मिश्री, पंचामृत और 56 भोग अर्पित किए जाते हैं।
- भजन-कीर्तन – मंदिरों और घरों में रात्रि भर भजन गाए जाते हैं।
7. सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव
- कला – जन्माष्टमी ने भारतीय चित्रकला, संगीत और नृत्य को समृद्ध किया है।
- समाज में एकता – यह पर्व जाति, धर्म और भाषा की सीमाओं को पार कर लोगों को जोड़ता है।
- युवा ऊर्जा – दही हांडी और रास उत्सव युवाओं में जोश भरते हैं।

8. प्रेरणात्मक संदेश
जन्माष्टमी हमें यह याद दिलाती है कि:
- विपरीत परिस्थितियों में भी साहस और धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए।
- कर्म करते रहना ही जीवन का सच्चा धर्म है।
- प्रेम और करुणा से सबसे कठिन शत्रु को भी जीता जा सकता है।
निष्कर्ष
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला का उत्सव है। चाहे मथुरा की गलियां हों, मुंबई की दही हांडी, या लंदन का ISKCON मंदिर—कन्हैया की बांसुरी की धुन और उनकी बाल-लीलाएं हर दिल को भक्ति और आनंद से भर देती हैं।
“जय श्रीकृष्ण” के नारे के साथ हम यह संकल्प लें कि धर्म, सत्य और प्रेम के मार्ग पर चलकर ही हम जीवन को सफल बना सकते हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: 2025 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है?
उत्तर: 2025 में कृष्ण जन्माष्टमी सोमवार, 16 अगस्त को मनाई जाएगी।
प्रश्न 2: कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?
उत्तर: यह भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की स्मृति में मनाई जाती है, जो अन्याय और अधर्म के अंत तथा धर्म की स्थापना के प्रतीक हैं।
प्रश्न 3: जन्माष्टमी पर क्या विशेष पूजा की जाती है?
उत्तर: भक्त उपवास रखते हैं, रात 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं, झूला सजाते हैं और भजन-कीर्तन करते हैं।
प्रश्न 4: क्या जन्माष्टमी दो दिन भी मनाई जाती है?
उत्तर: हाँ, कभी-कभी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र अलग-अलग दिन पड़ने पर यह पर्व दो दिन मनाया जाता है।
✍️ लेखक के बारे में (Author Section)
लेखक: सिद्धार्थ तिवारी
धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर गहरी समझ और वर्षों का अनुभव रखने वाले लेखक, जो परंपरा और आधुनिकता के संगम से पाठकों को जोड़ने का प्रयास करते हैं। कृष्ण जन्माष्टमी जैसे त्योहारों पर शोध आधारित, तथ्यपूर्ण और प्रेरणादायक लेख प्रस्तुत करना इनकी विशेषता है।
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Happy janmashtmi