भारत-चीन: क्या अब सीमा विवाद खत्म होगा?

Spread the love

भारत-चीन सीमा विवाद का इतिहास

भारत और चीन की सीमा दुनिया की सबसे लंबी स्थलीय सीमाओं में से एक है, जो लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी है। इस सीमा को अक्सर “Line of Actual Control (LAC)” कहा जाता है। लेकिन यह सीमा पूरी तरह स्पष्ट और परिभाषित नहीं है, और यही विवाद की जड़ है।

1. औपनिवेशिक दौर की पृष्ठभूमि

  • 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश भारत और चिंग साम्राज्य (चीन) के बीच सीमाओं की रेखाएँ स्पष्ट रूप से खींची नहीं गई थीं।
  • ब्रिटिश अधिकारियों ने हिमालय क्षेत्र में कई बार सीमांकन रेखाएँ प्रस्तावित कीं:
    • जॉनसन रेखा (1865): इसमें अक्साई चिन भारत के अधीन दिखाया गया।
    • मैककार्टनी-मैकडोनाल्ड रेखा (1899): इसमें अक्साई चिन को चीन का हिस्सा माना गया।
    • मैकमोहन रेखा (1914): शिमला सम्मेलन में ब्रिटिश भारत और तिब्बत के बीच खींची गई। चीन ने इस पर कभी आधिकारिक सहमति नहीं दी।

👉 नतीजा: आज अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश विवाद की मुख्य वजह हैं।

2. स्वतंत्रता के बाद का दौर (1947–1959)

  • भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ और चीन ने 1949 में तिब्बत पर नियंत्रण स्थापित किया।
  • भारत ने 1954 में पंचशील समझौता (भारत-चीन शांति और मैत्री समझौता) किया।
  • लेकिन 1950 के दशक में चीन ने अक्साई चिन से होकर शिनजियांग और तिब्बत को जोड़ने वाली सड़क बना ली, जिसे भारत ने 1957 में खोजा।
  • यहीं से सीमा विवाद खुलकर सामने आया।

3. 1962 का भारत-चीन युद्ध

  • अक्टूबर–नवंबर 1962 में चीन ने भारत पर दो मोर्चों पर हमला किया:
    • लद्दाख (अक्साई चिन क्षेत्र)
    • अरुणाचल प्रदेश (तब नेफा)
  • युद्ध में भारत को भारी नुकसान हुआ और चीन ने अक्साई चिन पर स्थायी नियंत्रण कर लिया।
  • युद्ध के बाद “Line of Actual Control (LAC)” अस्तित्व में आई, लेकिन इसे कभी औपचारिक सीमा के रूप में मान्यता नहीं मिली।

4. 1967 – नाथू ला और चो ला झड़प

  • सिक्किम सीमा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव हुआ।
  • भारत ने मजबूती से जवाब दिया और चीन को पीछे हटना पड़ा।
    👉 इससे भारतीय सेना का आत्मविश्वास लौटा।

5. 1980 का दशक – संबंध सुधार और वार्ता

  • 1981 से भारत और चीन के बीच सीमा वार्ता शुरू हुई।
  • 1987 में अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य बनाया गया, जिस पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई।
  • 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने चीन की यात्रा की और रिश्ते सामान्य करने की कोशिश की।

6. 1993 और 1996 के समझौते

  • 1993: “Peace and Tranquility Agreement” – दोनों देशों ने LAC का सम्मान करने और सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमति जताई।
  • 1996: सीमा पर सैन्य गतिविधियों को सीमित करने का समझौता।

👉 यह एक महत्वपूर्ण चरण था जब विवाद को “प्रबंधित” करने पर जोर दिया गया।

7. कारगिल युद्ध और उसके बाद (1999–2013)

  • 1999 में कारगिल युद्ध के समय चीन ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान का खुलकर समर्थन नहीं किया, जिससे रिश्ते बेहतर हुए।
  • लेकिन सीमा पर झड़पें जारी रहीं:
    • 2013 – देपसांग (लद्दाख)
    • 2014 – चुमार (लद्दाख)
    • 2017 – डोकलाम संकट (भारत-भूटान-चीन त्रिकोणीय क्षेत्र)

8. गलवान घाटी संघर्ष (2020)

  • जून 2020 में गलवान घाटी (लद्दाख) में भारत-चीन सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई।
  • इसमें 20 भारतीय जवान शहीद हुए और चीन को भी हताहत झेलने पड़े।
  • यह घटना 1962 के बाद सबसे गंभीर मानी जाती है।

9. हालिया दौर (2020–2025)

  • 2020 से लेकर अब तक सीमा पर कई दौर की कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता हुई।
  • कई स्थानों से सेनाएँ पीछे हटाई गईं, लेकिन अभी भी देपसांग और दौलत बेग ओल्डी जैसे इलाकों में विवाद बाकी रहा।
  • 2025 में इतिहास में पहली बार भारत और चीन ने स्थायी सीमा समाधान पर सहमति जताई। यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिससे एशिया की भू-राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा।
भारत-चीन सीमा विवाद पर उच्च स्तरीय बैठक – समझौते की संभावना"
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर हुई बैठक, रिश्तों में सुधार और समाधान की उम्मीदें बढ़ीं।”

विवाद के प्रमुख क्षेत्र

  1. अक्साई चिन (लद्दाख): भारत इसे अपना हिस्सा मानता है, चीन इसे शिनजियांग का हिस्सा बताता है।
  2. अरुणाचल प्रदेश: चीन इसे “दक्षिण तिब्बत” कहता है।
  3. सिक्किम और डोकलाम क्षेत्र: सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण।

2025 का ऐतिहासिक समझौता – “स्थायी सीमा समाधान”

2025 में बीजिंग में दोनों देशों ने इतिहास का पहला स्थायी सीमा समाधान समझौता किया।

समझौते की मुख्य बातें:

  1. LAC को मान्यता: दोनों देशों ने मौजूदा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को व्यावहारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा (Practical International Boundary) के रूप में स्वीकार किया।
  2. अक्साई चिन: भारत ने औपचारिक रूप से अक्साई चिन पर चीन के प्रशासनिक नियंत्रण को चुनौती न देने पर सहमति दी।
  3. अरुणाचल प्रदेश: चीन ने पहली बार अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा मान लिया।
  4. संयुक्त सीमा विकास परिषद: दोनों देश सीमा क्षेत्रों में व्यापार, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन को मिलकर बढ़ावा देंगे।
  5. सैन्य तैनाती में कमी: संवेदनशील क्षेत्रों से दोनों सेनाओं की चरणबद्ध वापसी।
  6. भविष्य विवाद समाधान तंत्र: किसी भी नई समस्या पर 90 दिनों के भीतर विशेष आयोग निर्णय करेगा।

समझौते का महत्व

  • पहली बार 60 साल से चले आ रहे सीमा विवाद का समाधान हुआ।
  • भारत-चीन संबंधों में नया युग शुरू।
  • भारत को उत्तर-पूर्व और लद्दाख में सुरक्षा की मजबूती मिली।
  • एशिया में स्थिरता और शांति के नए द्वार खुले।

MEA (Ministry of External Affairs), Indiahttps://www.mea.gov.in

चीन के लिए महत्व

  • रणनीतिक गहराई: चीन तिब्बत क्षेत्र को अपनी सुरक्षा का ढाल मानता है। भारत को दबाव में रखकर वह तिब्बत पर पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहता है।
  • आर्थिक और सैन्य दृष्टिकोण: अक्साई चिन चीन के लिए शिनजियांग और तिब्बत को जोड़ने का सबसे सुरक्षित मार्ग है।
  • तवांग का महत्व: तवांग बौद्ध धर्म का केंद्र है। इसे नियंत्रित कर चीन दलाई लामा संस्थान और तिब्बत की धार्मिक राजनीति पर दबदबा बनाना चाहता है।
  • एशियाई नेतृत्व: भारत-चीन सीमा विवाद का उपयोग करके चीन यह संदेश देना चाहता है कि एशिया में नेतृत्व उसी के हाथ में है।

वैश्विक भू-राजनीति पर असर

  1. भारत-अमेरिका समीकरण
    • चीन के आक्रामक रुख ने भारत को अमेरिका के और करीब ला दिया।
    • इंडो-पैसिफिक रणनीति, क्वाड (QUAD) और AUKUS में भारत की भूमिका चीन को घेरने की रणनीति को मजबूत करती है।
  2. रूस की स्थिति
    • रूस पारंपरिक रूप से भारत का रणनीतिक साझेदार रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में रूस-चीन की नजदीकी बढ़ी है।
    • भारत-चीन तनाव रूस के लिए असहज स्थिति पैदा करता है क्योंकि उसे दोनों से रिश्ते संतुलित रखने होते हैं।
  3. अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा
    • भारत-चीन सीमा विवाद से अमेरिका को एशिया में चीन को घेरने का अवसर मिलता है।
    • अमेरिका भारत को “काउंटर बैलेंस” के रूप में देखता है और उसे टेक्नोलॉजी, रक्षा और कूटनीतिक समर्थन देता है।
  4. वैश्विक शक्ति संतुलन
    • भारत-चीन टकराव केवल एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति में दो संभावित महाशक्तियों के बीच शक्ति संतुलन का सवाल है।
    • यह विवाद भविष्य में “नया शीत युद्ध” (Cold War 2.0) के केंद्र में रह सकता है।

Press Information Bureau (PIB) https://pib.gov.in

भारत सरकार और मंत्रालयीय बयान

विदेश मंत्रालय

  • भारत बार-बार दोहराता है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और चीन का दावा अस्वीकार्य है।
  • विदेश मंत्रालय ने गलवान संघर्ष के बाद कहा: “भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चीन की किसी भी एकतरफा कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया जाएगा।”

रक्षा मंत्रालय

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (2020) ने संसद में कहा: “हमने चीन को स्पष्ट कर दिया है कि हम सीमा पर शांति चाहते हैं, लेकिन यदि कोई चुनौती दी जाती है तो हमारी सेना हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम है।”

Read More https://muddabharatka.com/agni-5-missile-test-2025-bharat-ki-raksha-shakti/

भारत और चीन की सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर आमने-सामने खड़ी, तनावपूर्ण माहौल।
भारत-चीन सीमा विवाद: LAC पर आमने-सामने खड़ी सेनाएँ, कूटनीतिक समाधान की तलाश जारी।

निष्कर्ष

भारत-चीन सीमा विवाद केवल भौगोलिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भू-राजनीतिक, रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। भारत के लिए आवश्यक है कि:

  • सैन्य क्षमता को मजबूत रखा जाए।
  • कूटनीतिक बातचीत जारी रहे।
  • आर्थिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर ध्यान दिया जाए (जैसे Atmanirbhar Bharat और Bharat Drone Shakti 2025)।
  • वैश्विक साझेदारी (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया आदि) को मजबूत किया जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. भारत-चीन सीमा कितनी लंबी है?
👉 लगभग 3,488 किलोमीटर (LAC)।

Q2. अक्साई चिन किसके कब्ज़े में है?
👉 चीन के कब्ज़े में है, लेकिन भारत इसे लद्दाख का हिस्सा मानता है।

Q3. चीन अरुणाचल प्रदेश को क्यों विवादित मानता है?
👉 चीन इसे “दक्षिण तिब्बत” कहता है और ऐतिहासिक दावा करता है।

Q4. भारत-चीन युद्ध कब हुआ था?
👉 1962 में।

Q5. गलवान घाटी संघर्ष में कितने भारतीय जवान शहीद हुए?
👉 20 भारतीय जवान।

✍️ लेखक परिचय

सिद्धार्थ तिवारी – UPSC विश्लेषक और Mudda Bharat Ka ब्लॉग के लेखक।
इनका उद्देश्य है कि जटिल राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों को सरल भाषा में समझाया जाए ताकि छात्र, शोधार्थी और आम नागरिक नीति-निर्माण के गहरे पहलुओं को समझ सकें।

📢 Call to Action (CTA)

👉 अगर आपको यह लेख उपयोगी लगा तो इसे शेयर करें और भारत-चीन संबंधों पर अपनी राय कमेंट में लिखें।
👉 UPSC और करेंट अफेयर्स से जुड़े और गहन लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहिए Mudda Bharat Ka के साथ।

2 thoughts on “भारत-चीन: क्या अब सीमा विवाद खत्म होगा?”

Leave a Comment