अपडेट: 1 सितम्बर 2025 • श्रेणी: अंतरराष्ट्रीय संबंध / कूटनीति
पीएम मोदी का चीन दौरा 2025 – सीमा विवाद से रणनीतिक तालमेल तक
प्रस्तावना
भारत और चीन—दो एशियाई दिग्गज—के रिश्ते एशिया ही नहीं, समूचे विश्व की शक्ति-संतुलन रचना को प्रभावित करते हैं। पिछले पाँच वर्षों में, विशेषकर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद, संबंधों में स्पष्ट तनाव देखा गया। अगस्त–सितम्बर 2025 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए तियानजिन, चीन पहुँचे, तो इसे महज़ एक औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि भरोसे की बहाली और pragmatic engagement का संकेत माना गया।
SCO शिखर सम्मेलन 2025: पृष्ठभूमि
- स्थान: तियानजिन, चीन
- तिथियाँ: 31 अगस्त – 1 सितम्बर 2025
- स्वरूप: SCO की 25वीं बैठक जिसमें भारत, चीन, रूस, ईरान और मध्य एशियाई देशों के प्रमुख शामिल
अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्धा, रूस–यूक्रेन युद्ध और वैश्विक सप्लाई‑चेन पुनर्संतुलन के दौर में, SCO मंच पर भारत की सक्रिय उपस्थिति रणनीतिक स्वायत्तता के सिद्धांत को पुष्ट करती है।
दौरे का ऐतिहासिक महत्व
- गलवान के बाद पहली यात्रा: 2020 के बाद चीन की यह पहली उच्च‑स्तरीय यात्रा।
- लंबा अंतराल: 2018 वुहान और 2019 महाबलीपुरम के अनौपचारिक शिखरों के बाद, आमने‑सामने बातचीत का पुनरारंभ।
- राजनीतिक संदेश: प्रतिस्पर्धा के बीच सहयोग की संभावनाएँ—managed competition की ओर इशारा।
चीन में मोदी का स्वागत

तियानजिन एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का स्वागत ‘वंदे मातरम’ की धुन, रेड कार्पेट और पारंपरिक चीनी साज़ के साथ किया गया—जो इस बात का संकेत है कि बीजिंग रिश्तों को री‑सेट करना चाहता है।
“सीमा पर शांति और स्थिरता—द्विपक्षीय रिश्तों की बुनियाद।”
मोदी–शी वार्ता: मुख्य बिंदु
1) सीमा विवाद और डी‑एस्केलेशन
- विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर संवाद तंत्र को अपडेट करने पर जोर।
- संवेदनशील पैट्रोलिंग पॉइंट्स पर डी‑एस्केलेशन की गति बढ़ाने का लक्ष्य।
- दोनों पक्षों द्वारा दोहराव: “सीमा पर शांति ही व्यापक संबंधों का आधार।”
2) व्यापार और आर्थिक सहयोग
- रेयर‑अर्थ मिनरल्स और ग्रीन टेक्नोलॉजी में सहयोग की संभावनाएँ।
- भारत द्वारा मार्केट एक्सेस बढ़ाने और ट्रेड डेफिसिट घटाने पर बल।
- ई‑वीज़ा सहजता और डायरेक्ट फ्लाइट्स बहाली की घोषणा।
3) कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंध
- दिल्ली–बीजिंग सहित प्रमुख शहरों के बीच एयर लिंक की वापसी।
- पर्यटन, शिक्षा और शोध के लिए वीज़ा प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
4) आतंकवाद पर साझा रुख
- UNSC और SCO ढाँचों में काउंटर‑टेररिज्म सहयोग पर सहमति।
- “आतंकवाद के किसी भी रूप के लिए शून्य सहिष्णुता” का साझा संदेश।
सारणी
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| तिथियाँ | 31 अगस्त – 1 सितम्बर 2025 |
| स्थान | तियानजिन, चीन (SCO शिखर सम्मेलन) |
| मुख्य एजेंडा | सीमा स्थिरता, व्यापार, कनेक्टिविटी, आतंकवाद‑विरोध |
| परिणाम (घोषित) | डायरेक्ट फ्लाइट्स/वीज़ा सहजता, संवाद तंत्र का पुनर्सक्रियन |
SCO में भारत की रणनीति
- ऊर्जा सुरक्षा: रूस, ईरान और मध्य एशिया के साथ सहयोग से आपूर्ति विविधीकरण।
- काउंटर‑टेररिज्म: SCO‑RATS ढाँचे को मजबूत करना।
- डिजिटल सहयोग: भारत का Digital Public Infrastructure (DPI) मॉडल साझेदारी हेतु प्रस्तुत।
भारत‑चीन संबंधों का नया अध्याय?

कई विश्लेषक इसे “री‑सेट मोमेंट” मान रहे हैं। कूटनीतिक स्तर पर यह संकेत है कि दोनों देश नियंत्रित प्रतिस्पर्धा के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। आर्थिक मोर्चे पर, सहयोग का दायरा बढ़े तो एशिया की विकास कथा में इंडिया‑चाइना डबल‑इंजन की भूमिका सुदृढ़ हो सकती है।
चुनौतियाँ अभी भी बाकी
- LAC पर तनाव: कुछ सेक्टरों में तैनाती और गश्त पैटर्न संवेदनशील बने हुए हैं।
- BRI पर असहमति: भारत अब भी बेल्ट‑एंड‑रोड पहल से बाहर है।
- इंडो‑पैसिफिक प्रतिस्पर्धा: QUAD में भारत की भूमिका बीजिंग के संदेह का कारण।
भारतीय विदेश नीति का संतुलन
यह दौरा दिखाता है कि भारत की नीति ना तो केवल पश्चिम‑केंद्रित है और ना ही केवल रूस‑चीन धुरी पर टिकी। भारत मल्टी‑अलाइनमेंट के व्यावहारिक मॉडल—QUAD, I2U2, BRICS और SCO—सभी प्लेटफॉर्म्स पर अपने हित साध रहा है।
पीएम मोदी के संदेश
- “सीमा पर शांति ही रिश्तों की नींव है।”
- “आतंकवाद मानवता का दुश्मन है—SCO को समन्वित कार्रवाई करनी होगी।”
- “भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर साझी समृद्धि का इंजन बन सकता है।”
निष्कर्ष
पीएम मोदी का चीन दौरा 2025 केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि एशिया में शक्ति‑संतुलन की नई परिभाषा गढ़ने का प्रयास है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह मतभेदों को प्रबंधित करते हुए, विन‑विन अवसर खोजने को तत्पर है। चीन के लिए भी संदेश साफ है—बराबरी और पारस्परिक सम्मान के साथ आगे बढ़ा जाए तो एशियाई सदी के स्वप्न को ठोस धरातल मिल सकता है।
UPSC दृष्टिकोण
- GS‑II: भारत‑चीन संबंध, सीमा विवाद समाधान की प्रक्रिया, बहुपक्षीय मंचों की भूमिका।
- GS‑III: अर्थव्यवस्था, रेयर‑अर्थ, ऊर्जा सुरक्षा, आंतरिक‑बाह्य सुरक्षा में समन्वय।
- निबंध: “सहयोग और प्रतिस्पर्धा—भारत‑चीन संबंधों का द्वंद्व।”
FAQs
- प्र. पीएम मोदी का चीन दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?
- उ. यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पहली उच्च‑स्तरीय यात्रा है, जो रिश्तों में संतुलन बहाली का संकेत देती है।
- प्र. SCO में भारत की प्राथमिकताएँ क्या रहीं?
- उ. आतंकवाद‑विरोध, ऊर्जा सुरक्षा, और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का साझाकरण।
- प्र. क्या सीमा विवाद सुलझ गया है?
- उ. नहीं, पर संवाद और डी‑एस्केलेशन की दिशा में ठोस पहलें दोहराई गई हैं।
- प्र. विदेश नीति पर इसका क्या असर?
- उ. भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और मल्टी‑अलाइनमेंट दृष्टिकोण को मजबूती।