जन विश्वास विधेयक 2.0 (Jan Vishwas Bill 2.0): सुधार, सरलीकरण और विश्वास की नई दिशा
प्रस्तावना
भारत में आर्थिक विकास और Ease of Doing Business को बढ़ावा देने के लिए विधायी और प्रशासनिक सुधार लगातार किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों की श्रृंखला में जन विश्वास विधेयक 2.0 (Jan Vishwas Bill 2.0) लाया गया है। यह विधेयक पुराने दंडात्मक प्रावधानों को आसान बनाकर, व्यापार और उद्योग के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करने का लक्ष्य रखता है।
सरकार का मानना है कि “विश्वास पर आधारित शासन (Trust-Based Governance)” आज के समय की आवश्यकता है। छोटे-छोटे तकनीकी उल्लंघनों के लिए जेल और आपराधिक मुकदमों की बजाय, उन्हें आर्थिक दंड और प्रशासनिक कार्रवाई से निपटाना अधिक उपयुक्त है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
भारत की न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचा लंबे समय से Colonial Laws और कठोर दंडात्मक प्रावधानों से प्रभावित रहा है। कई ऐसे कानून हैं जो स्वतंत्रता-पूर्व काल में बने और आज की आधुनिक अर्थव्यवस्था और समाज के लिए प्रासंगिक नहीं रहे।
- व्यापारियों, स्टार्टअप्स और निवेशकों को कई बार ऐसे पुराने कानूनों के तहत आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ता था।
- इससे Ease of Doing Business पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता था और विदेशी निवेशक भारत में निवेश करने से हिचकिचाते थे।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने “कम से कम सरकार, अधिक से अधिक शासन (Minimum Government, Maximum Governance)” के सिद्धांत पर काम करते हुए, इन पुराने कानूनों को संशोधित करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
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जन विश्वास विधेयक 2.0 का उद्देश्य
- आपराधिक प्रावधानों को घटाना – छोटे-छोटे उल्लंघनों के लिए जेल की सज़ा खत्म करना।
- आर्थिक दंड प्रणाली लागू करना – Monetary Penalty और Compounding System का प्रावधान।
- Ease of Doing Business को बढ़ाना।
- निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित करना।
- नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास की संस्कृति स्थापित करना।
डीक्रिमिनलाइजेशन (Decriminalisation) का स्कोप
इस विधेयक के तहत कई प्रावधानों को डीक्रिमिनलाइज किया गया है। यानी:
- अब तकनीकी या मामूली उल्लंघनों पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा।
- इसके बजाय आर्थिक दंड, प्रशासनिक कार्रवाई और सुधार का अवसर मिलेगा।
- इससे अदालतों पर बोझ कम होगा और व्यवसायियों को राहत मिलेगी।

जन विश्वास विधेयक 2.0 के अंतर्गत संशोधित 16 कानून
जन विश्वास विधेयक 2.0 के तहत 16 विभिन्न कानूनों में संशोधन किए जाएंगे। इनमें प्रमुख कानून निम्नलिखित हैं:
- भारतीय डाक अधिनियम (Indian Post Office Act, 1898)
- कृषि उत्पादन (ग्रेडिंग और मार्किंग) अधिनियम, 1937
- मोटर वाहन अधिनियम, 1988
- सार्वजनिक ऋण अधिनियम, 1944
- भारतीय वन अधिनियम, 1927
- खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद अधिनियम
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम
- कंपनी अधिनियम के कुछ प्रावधान
- पेटेंट अधिनियम, 1970
- ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999
- इंटरनेट और सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित प्रावधान
- भारतीय बंदरगाह अधिनियम
- भारतीय विमानन अधिनियम
- भारतीय औषधि अधिनियम
PIB Release https://pib.gov.in/
दंडात्मक प्रावधानों में बदलाव (महत्वपूर्ण उदाहरण)
1. मोटर वाहन अधिनियम (MV Act)
- पहले: प्रति अतिरिक्त यात्री ₹200 तक का जुर्माना।
- अब: सिविल पेनल्टी ₹200 प्रति यात्री अतिरिक्त।
2. MSME अधिनियम
- पहले: सूचना न देने पर ₹1000 तक का जुर्माना।
- अब: पहली गलती पर चेतावनी, दूसरी या उसके बाद उल्लंघन पर ₹50,000 तक सिविल पेनल्टी।
3. लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम
- पहले: पहली बार गलती पर ₹1 लाख, दूसरी पर ₹2 लाख और तीसरी पर ₹5 लाख जुर्माना।
- अब: पहली गलती पर सुधार नोटिस, दूसरी पर ₹1 लाख जुर्माना, तीसरी पर दोगुना जुर्माना (अधिकतम ₹5 लाख)।
भारत सरकार का Ministry of Law & Justice https://legislative.gov.in
कुछ पुराने कानूनों का संशोधन या समाप्ति (Revocation)
1. दिल्ली नगरपालिका निगम अधिनियम (DMC Act)
- झाड़ूदार अनुपस्थित रहने पर: पहले 1 महीने की कैद और जुर्माना। अब पहली बार चेतावनी, दूसरी बार ₹500 पेनल्टी।
- सड़क की लाइट बुझाने पर: पहले ₹50 जुर्माना, अब प्रावधान हटाया गया।
- बाज़ार में कोढ़ी या उपद्रवियों को न हटाने पर: पहले ₹50 जुर्माना, अब प्रावधान हटाया गया।
- सार्वजनिक जगह पर जानवर बांधने पर: पहले ₹100 जुर्माना। अब पहली गलती पर चेतावनी, दूसरी पर ₹1000 पेनल्टी और रोज़ाना ₹50 का जुर्माना।
प्रमुख प्रावधान
- Penalty Rationalisation – जुर्माने की राशि समय-समय पर महंगाई के अनुसार बढ़ाई जाएगी।
- Adjudication Mechanism – प्रत्येक उल्लंघन पर एक अधिकारी दंड तय करेगा।
- Ease of Living & Doing Business – नागरिक और व्यापारी अनावश्यक कानूनी झंझटों से बचेंगे।
- Digital Implementation – अधिकांश दंड ऑनलाइन माध्यम से अदा किए जा सकेंगे।

अपेक्षित लाभ
- अदालतों पर बोझ कम होगा।
- छोटे व्यवसायियों और स्टार्टअप्स को राहत मिलेगी।
- विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
- सरकारी-नागरिक संबंधों में विश्वास की नई संस्कृति बनेगी।
- आर्थिक गतिविधियाँ तेज़ होंगी।
आलोचनाएँ और चुनौतियाँ
- कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि डीक्रिमिनलाइजेशन से अपराधियों को छूट मिल सकती है।
- जुर्माने की रकम कम होने पर बड़े उद्योग इसे “कास्ट ऑफ बिज़नेस” मान सकते हैं।
- कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन ज़रूरी होगा।
UPSC दृष्टिकोण
UPSC तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह विधेयक कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
- Polity & Governance – कानून निर्माण और सुधार की प्रक्रिया।
- Economy – Ease of Doing Business, निवेश और आर्थिक विकास।
- Essay & Ethics – Trust-Based Governance का कॉन्सेप्ट।
- Current Affairs – संसद में प्रस्तुत विधेयक और इसके प्रभाव।
निष्कर्ष
जन विश्वास विधेयक 2.0 (Jan Vishwas Bill 2.0) भारत की न्याय और प्रशासनिक व्यवस्था में एक आधुनिक और प्रगतिशील सुधार है। यह नागरिकों और व्यवसायियों के जीवन को सरल बनाने के साथ-साथ निवेश और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा।
हालांकि इसके सफल कार्यान्वयन के लिए सख्त निगरानी, पारदर्शिता और समयबद्ध सुधार आवश्यक होंगे। अगर यह सही दिशा में लागू हुआ तो यह भारत को “Trust Based Economy” बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
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✍️ लेखक: सिद्धार्थ तिवारी
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. जन विश्वास बिल 2.0 क्या है?
👉 यह एक संशोधन विधेयक है, जिसका उद्देश्य पुराने कानूनों में सुधार करके व्यापार करने की आसानी (Ease of Doing Business) बढ़ाना और गैर-आवश्यक दंडात्मक प्रावधानों को हटाना है।
Q2. जन विश्वास बिल 2.0 से किसे सबसे अधिक फायदा होगा?
👉 उद्यमियों, स्टार्टअप्स, MSMEs और छोटे कारोबारियों को सबसे अधिक लाभ होगा क्योंकि उन्हें अब कई मामलों में सीधे जेल की सजा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
Q3. इस बिल में कितने कानूनों में बदलाव किए गए हैं?
👉 सरकार ने 100 से अधिक पुराने कानूनों और नियमों को संशोधित करने का प्रस्ताव रखा है।
Q4. क्या यह बिल आम नागरिकों पर भी असर डालेगा?
👉 हाँ, आम नागरिकों के लिए लाइसेंसिंग, रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज़ी प्रक्रिया सरल हो जाएगी।
✅ Call to Action (CTA)
👉 अगर आप UPSC Aspirant, छात्र या नीति में रुचि रखने वाले नागरिक हैं, तो Jan Vishwas Bill 2.0 को समझना आपके लिए जरूरी है।
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